मुंबई, 02 अप्रैल, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। अयोध्या में मंदिर के 5 शिखरों का प्रतिष्ठा पूजन हुआ। राम मंदिर के पुरोहित आचार्य दुर्गा प्रसाद ने विधि-विधान से पूजा कराई। कलश पूजन के मुख्य यजमान श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास रहे। उन्होंने शिखर पूजन किया। शिखर लगने के बाद उस पर स्वर्ण कलश स्थापित किए जाएंगे। पुरोहित आचार्य ने बताया, 11 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ राम मंदिर के शिखर प्रतिष्ठा का पूजन आरंभ किया गया है। राम नवमी के शुभ अवसर पर इस पूजन का आरंभ होना समस्त राम भक्तों के लिए अत्यंत मंगलकारी और हर्ष का विषय है। रामनवमी पर करीब 20 लाख श्रद्धालुओं के अयोध्या पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में तीन दिन 4, 5 और 6 अप्रैल को रामलला के दर्शन के समय में बदलाव किए जाने की तैयारी है। जानकारी के मुताबिक, सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक रामलला के दर्शन हो सकेंगे। फिलहाल इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। अयोध्या में 6 अप्रैल को रामनवमी मनाई जाएगी।
राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया तेजी से बढ़ रही है। भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने बताया था कि मंदिर के शिखर पर लगाने के लिए मात्र पांच लेयर पत्थर शेष रह गए थे, और अब अंतिम पूजन के साथ यह प्रक्रिया पूर्ण होने जा रही है। इस बार राम लला का जन्मोत्सव पूर्ण निर्मित मंदिर में मनाया जाएगा, जो सभी भक्तों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा। रामनवमी उत्सव के आयोजन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस भव्य समारोह के लिए राम मंदिर को भव्य तरीके से लाइटों से सजा दिया गया है। सुग्रीव किला और अंगद टीला पर आर्टीफिशियल फूलों से प्रवेश द्वार बनाए गए हैं। राम मंदिर में रामनवमी पर सूर्य किरणों से रामलला के अभिषेक की तैयारियां भी पूरी हो गई हैं। सीबीआरआई के वैज्ञानिकों की टीम इस तैयारी में लगी है। टीम के वैज्ञानिक अयोध्या में ही डेरा डाले हुए हैं। सोमवार को वैज्ञानिकों की टीम ने सूर्य तिलक का टेस्ट किया है। महासचिव चंपत राय ने बताया, राम नवमी के दिन ठीक 12 बजे से चार मिनट तक सूर्य किरणों से रामलला के मस्तक पर तिलक होगा। 6 अप्रैल को रामलला जन्मोत्सव पर 20 लाख से अधिक श्रद्धालु अयोध्या पहुंच सकते हैं। इसे देखते हुए राम मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन सुविधाएं बढ़ाने में जुटा है। रामजन्मभूमि पथ पर अस्थाई कैनोपी लगाई जा चुकी है और मुख्य पर्व तक पथ पर लाल कारपेट भी बिछा दिया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए 200 स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय वर्तमान ने कहा- प्रभु श्रीराम के ललाट पर सूर्य अभिषेक की तैयारियां चल रही हैं और विशेषज्ञों की एक टीम इस काम में जुटी हुई है। सूर्य अभिषेक का प्रसारण पूरे विश्व में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए रामलला के दर्शन की अवधि बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।
वहीँ, चंपतराय ने बताया, राममंदिर के शिखर पर कलश की विधिपूर्वक पूजा की गई। राममंदिर के अलावा परिसर में स्थित सभी 16 मंदिरों के शिखरों पर कलश स्थापित किए जाएंगे। इन सभी कलशों का सामूहिक पूजन नवरात्र की पंचमी तिथि को वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में किया गया। इन मंदिरों के कलशों को स्वर्णमंडित करने की योजना भी बनाई गई है। ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया, राममंदिर के शिखर का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, और केवल 10 प्रतिशत काम बाकी है। अप्रैल के अंत तक शिखर का काम पूर्ण हो जाएगा, 31 लेयरों में से केवल दो लेयर ही शेष हैं। राम मंदिर के अलावा परकोटे में बन रहे छह मंदिरों (भगवान सूर्य, हनुमान, गणेश, माता जगदंबा, शंकर और माता अन्नपूर्णा) और सप्तमंडप के सात मंदिरों (महर्षि वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, निषादराज, अहिल्या और शबरी) के साथ-साथ संत तुलसीदास और शेषावतार मंदिर के शिखर पर भी कलश स्थापित किए जाएंगे। इन सभी कलशों का सामूहिक पूजन संपन्न हो चुका है, और अब अलग-अलग तिथियों और मुहूर्तों में इन कलशों की स्थापना की जाएगी। चंपत राय ने नवमी मेला में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एडवाइजरी जारी की है। कहा, आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में श्रद्धालु अपने सिर को धूप से बचाने का उपाय (टोपी, पगड़ी, गमछा आदि) करके बाहर निकलें। नींबू, चीनी, नमक या ओआरएस घोल गिलास के साथ रख सकें तो अति उत्तम है। जौ के सत्तू की व्यवस्था हो सके तो लू से तो बचाव होगा, पेट पर भी संकट नहीं आएगा।