प्रयागराज न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी पारा अभी से चढ़ने लगा है। समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव अपनी चुनावी बिसात को मजबूत करने और पुराने समीकरणों को दुरुस्त करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इसी सिलसिले में अखिलेश यादव संगम नगरी प्रयागराज के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे। इस दौरे की सबसे खास बात यह रही कि अखिलेश यादव पूरे 14 साल के लंबे अंतराल के बाद प्रयागराज में रात गुजारते नजर आए, जिसे राजनीतिक हलकों में सपा की सत्ता में वापसी की ठोस आधारशिला रखने के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में यह दिलचस्प किस्सा बेहद मशहूर है कि साल 2012 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अखिलेश यादव ने प्रयागराज (तब इलाहाबाद) में एक रात बिताई थी। वह रात उनकी सियासी तकदीर के लिए 'लकी चार्म' साबित हुई थी और उसके बाद प्रदेश में सपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी। अब ठीक 14 साल बाद एक बार फिर अखिलेश ने न सिर्फ प्रयागराज में रात गुजारी, बल्कि पार्टी के कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंकते हुए अपना भविष्य का सियासी एजेंडा भी सेट कर दिया। सपा खेमे का मानना है कि यह दौरा महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि पुरानी 'सकारात्मक ऊर्जा' के सहारे सूबे की बाजी पलटने की एक सोची-समझी रणनीति है।
अपने इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी के संरक्षक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के पुराने और सबसे भरोसेमंद सहयोगियों से मुलाकात की। उन्होंने इलाहाबादी सियासत के दिग्गज और मुलायम सिंह के 'राइट हैंड' माने जाने वाले कद्दावर नेता रेवती रमण सिंह के आवास पर जाकर उनका आशीर्वाद लिया। इसके साथ ही उन्होंने रेवती रमण के बेटे और स्थानीय कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह से भी मुलाकात कर गठबंधन को मजबूती दी। इसके बाद सपा प्रमुख पार्टी विधायक विजमा यादव और महानगर अध्यक्ष इफ्तिखार अहमद समेत कई जमीनी कार्यकर्ताओं के घर पहुंचे, जिससे स्थानीय नेताओं और युवाओं में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अखिलेश यादव की पुराने और अनुभवी नेताओं से यह मुलाकात 2027 के महामुकाबले के लिहाज से बेहद अहम है। अखिलेश यादव पार्टी के भीतर पुराने तजुर्बे और युवाओं के नए जोश को एक साथ जोड़कर अपनी रणनीति को धार दे रहे हैं। हालांकि पार्टी का मुख्य फोकस इस समय भी अपने पारंपरिक 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर है, लेकिन अखिलेश अब इसके दायरे को और व्यापक बनाने में जुटे हैं। चुनाव से काफी पहले शुरू हुआ अखिलेश यादव का यह संपर्क अभियान और पुराने दिग्गजों को साधने की यह कवायद 2027 में कितनी कामयाब होगी, यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा।