प्रयागराज न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश के शहर इन दिनों सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे गर्म इलाकों में शामिल हो रहे हैं। 18 मई की सुबह वैश्विक तापमान की रियल-टाइम निगरानी करने वाले एक डैशबोर्ड में प्रयागराज, बांदा और मिर्जापुर दुनिया के सबसे गर्म शहरों की सूची में शीर्ष पर दर्ज किए गए थे। इसके चार दिन बाद, 22 मई को दुनिया के 50 सबसे गर्म शहरों की सूची में शामिल सभी शहर भारत के थे, जिनमें उत्तर प्रदेश के कई शहर प्रमुख रहे। वाराणसी, अयोध्या, बांदा, बरेली और प्रयागराज जैसे शहरों में सुबह के समय ही तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोई नई स्थिति नहीं है, बल्कि लगातार गंभीर होती जा रही समस्या है। हालांकि देश में हीटवेव की चर्चा अक्सर दिल्ली तक सीमित रह जाती है, जबकि उत्तर प्रदेश के बड़े और मध्यम शहर भी भीषण गर्मी की मार झेल रहे हैं। इसके बावजूद इन शहरों को न तो उतना ध्यान मिलता है और न ही गर्मी से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हो पाते हैं।
प्रयागराज पिछले कुछ वर्षों में कई बार रिकॉर्डतोड़ गर्मी का सामना कर चुका है। 17 जून 2024 को यहां अधिकतम तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो उस दिन देश में सबसे अधिक था। इससे एक दिन पहले तापमान 47.1 डिग्री सेल्सियस रहा था। वहीं 15 जून 2024 की रात न्यूनतम तापमान 34.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसने 127 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। इससे पहले जून 1898 में न्यूनतम तापमान 33.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। अप्रैल 2022 में भी प्रयागराज ने 46.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज कर देश का नया रिकॉर्ड बनाया था।
विशेषज्ञों के अनुसार, अब सिर्फ तापमान ही नहीं बल्कि बढ़ती नमी भी खतरे को बढ़ा रही है। ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद (CEEW) के हवाले से किए गए शोध में पाया गया है कि पिछले एक दशक में इंडो-गंगा के मैदानी क्षेत्रों में आर्द्रता लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ी है। इससे शरीर की प्राकृतिक शीतलन प्रक्रिया प्रभावित होती है और हीट स्ट्रेस का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में बढ़ता "अर्बन हीट आइलैंड" प्रभाव भी रात के तापमान को लगातार ऊंचा बनाए रख रहा है। शोध के अनुसार, 2000 से 2017 के बीच भारत के 44 प्रमुख शहरों में रात के सतही तापमान में औसतन 0.64 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे लोगों के लिए गर्मी से राहत पाना और मुश्किल हो गया है।