प्रयागराज न्यूज डेस्क: उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश का असर अब प्रयागराज में भी दिखाई देने लगा है। गंगा और यमुना दोनों नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। प्रशासन ने तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है और बाढ़ से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं।
सिंचाई विभाग के अनुसार, कानपुर बैराज से छोड़े जा रहे पानी की मात्रा में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 25 जुलाई को जहां 42 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, वहीं 26 जुलाई को यह बढ़कर 64 हजार क्यूसेक हो गया। 27 जुलाई की सुबह बैराज से 1.07 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिसके प्रयागराज पहुंचने के बाद जलस्तर और बढ़ने की संभावना है।
सोमवार शाम तक फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 77.61 मीटर और नैनी में यमुना का जलस्तर 74.59 मीटर दर्ज किया गया। हालांकि दोनों नदियां अभी खतरे के निशान 84.73 मीटर से नीचे हैं, लेकिन कई तटीय इलाकों में पानी का असर दिखने लगा है।
सोरांव, फाफामऊ, फूलपुर, करछना, मेजा और हंडिया के कई गांवों में नालों के जरिए गंगा का पानी बस्तियों की ओर बढ़ने लगा है। वहीं मध्य प्रदेश की केन और बेतवा नदियों का पानी भी यमुना में मिल रहा है, जबकि टोंस नदी का जलस्तर भी बढ़ रहा है।
संभावित बाढ़ को देखते हुए जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने नगर आयुक्त सीलम साईं तेजा और अन्य अधिकारियों के साथ छोटा बघाड़ा, दारागंज और गंगानगर समेत तटीय क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने लोगों से अपील की कि जलस्तर बढ़ने का इंतजार न करें और समय रहते राहत शिविरों में पहुंच जाएं।
प्रशासन ने अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कंट्रोल रूम और संबंधित अधिकारियों के मोबाइल नंबर सार्वजनिक करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, शौचालय, सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं की पहले से व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।