प्रयागराज न्यूज डेस्क: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच प्रयागराज के 23 वर्षीय युवक रामचंद्र दुबे के लापता होने से परिवार गहरे सदमे में है। परिवार का कहना है कि यूक्रेन के पास एक मालवाहक जहाज पर रूसी ड्रोन हमले के बाद से पिछले पांच दिनों से उनका कोई पता नहीं चल सका है। परिजन लगातार सरकार से बेटे को सुरक्षित वापस लाने की अपील कर रहे हैं।
परिवार के अनुसार, रामचंद्र दुबे 25 सितंबर 2025 को ड्वेलोशिप मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड की शिप में क्रू मेंबर के तौर पर शामिल हुए थे। उनका जहाज यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से ग्रीस के लिए रवाना हुआ था। 24 जुलाई को उन्होंने वीडियो कॉल के जरिए परिवार से बात की थी और बताया था कि जहाज पर सब कुछ सामान्य है।
रामचंद्र की बहन सीमाक्षी ने बताया कि 26 जुलाई को कंपनी की ओर से सूचना मिली कि 25 जुलाई को ओडेसा बंदरगाह के पास जहाज पर रूस की ओर से तीन ड्रोन हमले हुए। उस समय जहाज पर चार भारतीय समेत कुल 10 लोग मौजूद थे। हमले के दौरान रामचंद्र डेक पर काम कर रहे थे। हमले के बाद से रामचंद्र और बरेली निवासी उनके साथी दीपक गुप्ता लापता हैं।
परिजनों का कहना है कि समय पर प्रभावी सर्च ऑपरेशन नहीं होने से अब तक दोनों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। परिवार को भरोसा है कि यदि खोज अभियान तेज किया जाए तो उनके सुरक्षित मिलने की संभावना है। रामचंद्र के बड़े भाई और चाचा दिल्ली में कंपनी, भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं। परिवार ने सांसद प्रवीण पटेल और मनोज तिवारी से भी मदद की गुहार लगाई है।
परिवार का आरोप है कि कंपनी सर्च ऑपरेशन को लेकर अलग-अलग जानकारी दे रही है और सही स्थिति नहीं बता रही है। उनका कहना है कि पांच दिन बीत जाने के बावजूद रामचंद्र और उनके साथी के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है।
रामचंद्र के पिता रमेश चंद्र दुबे सेना से सेवानिवृत्त हैं। परिवार में दो भाई और तीन बहनें हैं। रामचंद्र की अभी शादी नहीं हुई है। परिवार को उम्मीद है कि वह सुरक्षित हैं और जल्द वापस लौटेंगे।
परिजनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश मंत्रालय से अपील की है कि संबंधित देशों से समन्वय कर दोनों लापता भारतीयों का जल्द पता लगाया जाए।