प्रयागराज न्यूज डेस्क: प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू (SRN) अस्पताल में संचालित नशा मुक्ति उपचार केंद्र युवाओं को दलदल से बाहर निकालने में एक बड़ी उम्मीद बनकर उभरा है। 8 फरवरी 2024 को शुरू हुए इस केंद्र ने अपने दो साल के सफर में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इलाज और सटीक काउंसलिंग की बदौलत अब तक 150 लोग पूरी तरह से नशे की लत को अलविदा कहकर सामान्य जिंदगी में लौट चुके हैं, जिनमें 56 मरीज अकेले स्मैक के घातक नशे का शिकार थे।
इस केंद्र की ओपीडी में हर महीने 150 से 200 ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जो शराब, गांजा, स्मैक और तरह-तरह की नशीली दवाओं के चंगुल में फंसे हुए हैं। केंद्र की चिकित्साधिकारी डॉ. सुमन तिवारी के मुताबिक, अस्पताल में आने वाले मरीजों में सबसे बड़ी संख्या स्मैक का नशा करने वालों की है। वर्तमान में केंद्र के पास 280 ऐसे मरीज पंजीकृत हैं, जिनका नियमित इलाज और मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शन किया जा रहा है। बेहद चिंताजनक बात यह है कि इस गंभीर लत का शिकार होने वालों में सबसे अधिक तादाद युवाओं और किशोरों की है।
नशे के आंकड़ों पर गौर करें तो स्मैक के बाद शराब की लत से जूझ रहे 80 मरीज और गांजा-भांग का सेवन करने वाले 70 पंजीकृत मरीजों का वर्तमान में उपचार चल रहा है। डॉक्टरों की टीम न सिर्फ दवाइयों से मरीजों का शारीरिक इलाज करती है, बल्कि थेरेपी और काउंसलिंग के जरिए उनके मानसिक व्यवहार को बदलकर इस बुरी आदत को हमेशा के लिए छुड़ाने के ठोस प्रयास कर रही है।
डॉ. सुमन तिवारी ने काउंसलिंग के दौरान सामने आए चौंकाने वाले कारणों का भी खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि आज की युवा पीढ़ी के नशे के दलदल में धंसने के पीछे गलत संगति, मानसिक तनाव, बेरोजगारी और सोशल मीडिया का बढ़ता नकारात्मक प्रभाव सबसे बड़े जिम्मेदार कारक हैं। इसके अलावा, कम समय में बहुत बड़ी सफलता या शॉर्टकट पाने की अंधी चाहत भी किशोरों को अवसाद की ओर धकेल रही है, जिससे बचने के लिए वे मादक पदार्थों का सहारा ले बैठते हैं।