प्रयागराज न्यूज डेस्क: प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल परिसर में बन रहा अत्याधुनिक चिल्ड्रेन अस्पताल नौ साल बाद भी शुरू नहीं हो सका है। अस्पताल प्रशासन ने निर्माण एजेंसी को सितंबर तक भवन हैंडओवर करने की अंतिम समय सीमा दी है, लेकिन निर्माण कार्य से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि अभी बिजली से जुड़े उपकरण और अग्निशमन प्रणाली लगाने का काम बाकी है। ऐसे में अस्पताल के नवंबर से पहले शुरू होने की संभावना कम नजर आ रही है।
नए अस्पताल के शुरू न होने का सीधा असर मौजूदा चिल्ड्रेन अस्पताल पर पड़ रहा है। यहां प्रयागराज समेत आसपास के 12 जिलों से बच्चे इलाज के लिए पहुंचते हैं। पिछले एक सप्ताह में ओपीडी में मरीजों की संख्या 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है। वायरल बुखार, डायरिया, सांस की तकलीफ, पेट दर्द और खांसी-जुकाम जैसी बीमारियों से रोज 30 से 40 बच्चों को भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है, लेकिन बेड की कमी के कारण कई परिवारों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है।
तीमारदारों का कहना है कि इलाज के दौरान जांच कराने में भी काफी परेशानी होती है। पहले चिल्ड्रेन अस्पताल में खून का सैंपल देना पड़ता है, फिर रिपोर्ट और अन्य जांच के लिए एसआरएन अस्पताल से मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग तक बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस भागदौड़ के कारण गंभीर मरीजों की हालत और बिगड़ने का खतरा बना रहता है।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि निर्माण एजेंसी को जल्द से जल्द काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, निर्माण कार्य की मौजूदा स्थिति को देखते हुए मरीजों और उनके परिजनों को अभी कुछ और महीनों तक इंतजार करना पड़ सकता है।