प्रयागराज न्यूज डेस्क: वकीलों और डॉक्टरों के बीच जारी विवाद के बीच अस्पताल प्रशासन ने मरीजों के इलाज की व्यवस्था में बदलाव किया है। मंगलवार को लिए गए फैसले के मुताबिक, अब ट्रामा सेंटर से गंभीर मरीजों को नई बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर स्थित मेडिसिन इमरजेंसी यूनिट (ईएमयू) में नहीं भेजा जाएगा। इसके बजाय मरीजों को ट्रामा सेंटर के भूतल पर पैथोलॉजी के बगल वाले वार्ड में भर्ती किया जाएगा। इसके लिए 12 बेड आरक्षित किए गए हैं। साथ ही मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों की यहां 24 घंटे तैनाती रहेगी।
अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक मेजर डॉ. जितेंद्र शुक्ल ने बताया कि पहले ट्रामा सेंटर से ज्यादातर मरीजों को मेडिसिन इमरजेंसी यूनिट में भेजा जाता था। इस दौरान मरीजों को वार्ड तक पहुंचाने में करीब 30 से 35 मिनट लग जाते थे। कई बार ईएमयू में बेड खाली नहीं होने के कारण मरीजों के तीमारदारों और डॉक्टरों के बीच विवाद की स्थिति बन जाती थी। नई व्यवस्था का मकसद मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना और ऐसी घटनाओं को रोकना है।
अस्पताल में इलाज को प्राथमिकता देने को लेकर डॉक्टरों और तीमारदारों के बीच पहले भी कई बार विवाद हो चुका है। हालांकि, ज्यादातर मामलों में सुरक्षा गार्ड बीच-बचाव कर स्थिति संभाल लेते थे। लेकिन 22 अक्टूबर की रात मामला गंभीर हो गया, जब अधिवक्ता सर्वेश शुक्ला अपने मरीज को लेकर ईएमयू पहुंचे थे। इस दौरान डॉक्टरों के साथ मारपीट की घटना हुई थी। वकीलों और डॉक्टरों के बीच चल रहे विवाद के बाद अस्पताल प्रशासन ने अब मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था बदलने का फैसला किया है।