प्रयागराज न्यूज डेस्क: प्रयागराज के लुकरगंज इलाके में चार साल पहले बुलडोजर से गिराए गए मकानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर और उर्दू साहित्यकार अली अहमद फातमी समेत पांच परिवारों को न्यायालय ने 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए घरों को ध्वस्त करने को असंवैधानिक और अमानवीय करार दिया। अब सवाल यह उठ रहा है कि जिस जमीन पर ये मकान बने थे, उसका क्या होगा?
प्रो. फातमी का 160 वर्ग गज का मकान नजूल की जमीन पर था, जिसका पट्टा 1999 में खत्म हो गया था। उनकी बेटी का मकान भी इसी तरह की जमीन पर बना था। प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने नोटिस जारी करने के बाद इन्हें गिराने की कार्रवाई की थी। हालांकि, प्रो. फातमी का दावा है कि उन्होंने पट्टा नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था और इसकी रसीद भी उनके पास मौजूद है। प्रशासन ने इस जमीन पर ईवीएम स्टोर बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन मामला अदालत में होने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रो. अली अहमद फातमी को कुछ राहत जरूर मिली है। उन्होंने कहा कि चार साल बाद न्याय मिलने से सुकून महसूस हो रहा है, लेकिन इस घटना ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से झकझोर दिया। घर टूटने के सदमे में उनकी पत्नी का निधन हो गया और फिर उन्हें हार्ट अटैक आया। रिटायरमेंट के बाद मिले फंड से उन्होंने करेली में एक छोटा फ्लैट लिया था, जहां अब बेटी के साथ रह रहे हैं।
प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) के अधिकारी इस जमीन को लेकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। उनके मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट का पूरा आदेश मिलने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। वहीं, स्थानीय लोगों में भी इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि क्या प्रशासन इस जमीन पर नया निर्माण करेगा या पीड़ित परिवारों को वापस सौंपेगा।