प्रयागराज न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मंगलवार को संगम तट पर भव्य 'त्रिवेणी आरती' की शुरुआत किए जाने के बाद, बुधवार को भी इस दिव्य परंपरा को पूरी भव्यता के साथ जारी रखा गया। मुख्य जलधारा में सुरक्षा बैरियर लगाकर और वीआईपी (VIP) पक्के घाट पर विधि-विधान से आरती व पूजन संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री योगी ने इस सराहनीय पहल के लिए प्रयागराज मेला प्राधिकरण के कार्यों की पीठ थपथपाई है, जिसके बाद अब प्राधिकरण संगम क्षेत्र के कायाकल्प के लिए अपनी मुख्य भूमिका में आने को पूरी तरह तैयार है।
संगम तट के विकास के लिए प्राधिकरण का मेगा प्लान:
सेना से जमीन लीज पर लेने का प्रयास: मेला प्राधिकरण के अधिकारियों ने त्रिवेणी संकुल को वैश्विक स्तर पर चमकाने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना (रोडमैप) तैयार की है। इसके तहत अफसरों का प्रयास है कि रक्षा मंत्रालय/सेना से वार्ता कर बांध के नीचे की खाली जमीन को कुछ वर्षों के लिए लीज (पट्टे) पर लिया जाए।
साल भर रहेगा आकर्षण: मेलाधिकारी ऋषिराज ने बताया कि यदि यह जमीन लीज पर मिल जाती है, तो वहां एक सुव्यवस्थित और आधुनिक 'वेंडिंग जोन' विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि माघ मेला या कुंभ के अलावा भी साल के बारह महीने यहां आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को एक बेहतरीन और सुखद अनुभव मिल सके।
तीर्थ पुरोहित और नाविक होंगे हाईटेक, प्रक्रिया होगी पारदर्शी:
संगम पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और बिचौलियों से मुक्ति दिलाने के लिए पूरी व्यवस्था को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है:
वेबसाइट पर ऑनलाइन ब्योरा: मेला प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट पर सभी तीर्थ पुरोहितों का पूरा विवरण उनके आवंटित जिलों और क्षेत्रों के साथ अपलोड किया जा रहा है। चूंकि प्रयागराज में तीर्थ पुरोहितों के क्षेत्र (यजमान बंटे) होते हैं, इसलिए श्रद्धालु घर बैठे ही ऑनलाइन अपने क्षेत्र के पुरोहित को ढूंढ सकेंगे। वेबसाइट पर उनका मोबाइल नंबर भी उपलब्ध होगा।
दक्षिणा की दरें होंगी तय: पूरी पूजा पद्धति को पारदर्शी बनाने के लिए वेबसाइट पर 'उत्तमा', 'मध्यमा' और 'निम्न' पूजन की दक्षिणा (फीस) का ब्योरा पहले से ही साफ-साफ दर्ज रहेगा, ताकि किसी भी श्रद्धालु से अतिरिक्त वसूली न हो सके।
महाकाल और केदारनाथ की तर्ज पर जारी होंगे 'आरती पास':
मेलाधिकारी ऋषिराज के अनुसार, उत्तराखंड के बद्रीनाथ-केदारनाथ और मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर की तर्ज पर अब प्रयागराज की त्रिवेणी आरती के लिए भी बकायदा 'आरती पास' जारी किए जाएंगे। उन्होंने तर्क दिया कि जब अन्य राज्यों के धार्मिक प्राधिकरण अपनी व्यवस्थाओं को इतना सुदृढ़ और व्यवस्थित रख सकते हैं, तो प्रयागराज मेला प्राधिकरण भी इसे बखूबी लागू करेगा। इस व्यवस्था से न केवल भीड़ प्रबंधन (क्राउड मैनेजमेंट) बेहतर होगा, बल्कि नाविकों, स्थानीय दुकानदारों और आम नागरिकों को भी रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।