प्रयागराज न्यूज डेस्क: प्रयागराज में गंगा नदी की पहचान और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण गंगा डॉल्फिन के संरक्षण के लिए वन विभाग ने एक अनूठी पहल शुरू की है। विभाग ने 'डॉलफिन फ्रेंड्स' (Dolphin Friends) नामक एक समर्पित स्वयंसेवक नेटवर्क तैयार किया है, जो इन जलीय जीवों की गतिविधियों पर नज़र रखने के साथ-साथ नदी किनारे रहने वाले समुदायों को जागरूक करने का काम करेगा।
प्रमुख पहल और रणनीतियां:
स्थानीय समुदायों की भागीदारी: प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) अरविंद कुमार यादव ने बताया कि इस अभियान में मछुआरों और नाविकों को विशेष रूप से शामिल किया जा रहा है। नदी और डॉल्फिन के व्यवहार से उनकी गहरी पहचान इस संरक्षण कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर मजबूती देगी।
वैज्ञानिक सहयोग: कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए शोधकर्ताओं और शिक्षण संस्थानों की मदद भी ली जा रही है ताकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से डॉल्फिन के संरक्षण को सुनिश्चित किया जा सके।
प्रजनन काल में कड़ी निगरानी: मानसून के दौरान, जो डॉल्फिन का प्रजनन काल होता है, निगरानी को और सघन कर दिया जाएगा। फाफामऊ, छतनाग और मेजा जैसे हॉटस्पॉट पर विशेष टीमें तैनात की गई हैं।
डॉल्फिन की संख्या में उत्साहजनक वृद्धि:
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (WWF) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रयागराज के गंगा क्षेत्र में डॉल्फिन की संख्या बढ़कर 139 हो गई है। वहीं, भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के सर्वेक्षण के मुताबिक, गंगा नदी प्रणाली में डॉल्फिन की कुल संख्या अब 5,689 है, जो 2021 के मुकाबले (3,275) काफी अधिक है। उत्तर प्रदेश अकेले 2,397 डॉल्फिन का घर है, जो इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
प्रशासनिक कदम:
जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा के निर्देशों के बाद एक विशेष 'एक्शन प्लान' लागू किया गया है। यह पहल 'नमामि गंगे' कार्यक्रम के तहत 'प्रोजेक्ट डॉल्फिन' का हिस्सा है। प्रसिद्ध वैज्ञानिक पद्मश्री अजय कुमार सोनकर का मानना है कि प्रयागराज-फतेहपुर क्षेत्र में डॉल्फिन की बढ़ती संख्या नदी की बेहतर होती स्वच्छता और स्वस्थ जलीय पारिस्थितिकी तंत्र का सीधा संकेत है।