भारत रत्न केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि भारतीय गणराज्य का वह सर्वोच्च शिखर है, जिसे छूने का स्वप्न हर असाधारण प्रतिभा देखती है। 2 जनवरी 1954 को शुरू हुआ यह सफर आज भारतीय इतिहास के उन पन्नों को संजोए हुए है, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में अपनी आहुति दी है। यह सम्मान किसी जाति, व्यवसाय, पद या लिंग के भेदभाव के बिना 'मानवीय प्रयास के किसी भी क्षेत्र' में असाधारण सेवा के लिए दिया जाता है।
आइए, भारत रत्न से जुड़े उन 10 रोचक और अनसुने तथ्यों पर नजर डालते हैं जो इसकी गरिमा और इतिहास को और भी गहरा बनाते हैं:
1. पदक की कलात्मक बनावट
भारत रत्न का पदक अपनी सादगी और प्रतीकवाद के लिए जाना जाता है। यह तांबे से बना पीपल के पत्ते के आकार का होता है। इसके मुख्य भाग पर प्लेटिनम का चमकता हुआ सूर्य अंकित होता है और नीचे देवनागरी लिपि में 'भारत रत्न' चांदी से लिखा होता है। इसके पिछले भाग पर राष्ट्रीय प्रतीक 'अशोक स्तंभ' और 'सत्यमेव जयते' उत्कीर्ण होता है।
2. बिना नकद राशि के VIP सुविधाएं
अक्सर लोग समझते हैं कि इतने बड़े सम्मान के साथ बड़ी धनराशि मिलती होगी, लेकिन सच्चाई यह है कि इसमें कोई नकद राशि नहीं दी जाती। इसके स्थान पर, राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित एक 'सनद' (प्रमाणपत्र) और पदक मिलता है। साथ ही, विजेता को भारत के वरीयता क्रम (Table of Precedence) में 7वें स्थान पर रखा जाता है, जो उन्हें कैबिनेट मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के समकक्ष दर्जा देता है। उन्हें सरकारी विमानों और ट्रेनों में आजीवन मुफ्त प्रथम श्रेणी यात्रा की सुविधा मिलती है।
3. नेताजी और एकमात्र 'वापसी' का विवाद
1992 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को मरणोपरांत यह सम्मान देने की घोषणा की गई थी। लेकिन उनकी मृत्यु के प्रमाणों की कमी और परिवार की इस आपत्ति के बाद कि 'मरणोपरांत' शब्द नेताजी के कद को छोटा करता है, भारत सरकार को पहली बार अपना निर्णय वापस लेना पड़ा।
4. राजनीति की भेंट: जब पुरस्कारों पर लगा 'बैन'
1977 में मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली जनता पार्टी सरकार ने भारत रत्न और अन्य पद्म पुरस्कारों को यह कहते हुए बंद कर दिया था कि ये संविधान के समानता के अधिकार के विरुद्ध हैं। हालांकि, 1980 में इंदिरा गांधी की वापसी के साथ ही यह परंपरा फिर से शुरू हुई।
5. सीमा पार भी पहुंची चमक
यह सम्मान केवल भारतीयों तक सीमित नहीं है। अब तक खान अब्दुल गफ्फार खान (पाकिस्तान) और नेल्सन मंडेला (दक्षिण अफ्रीका) जैसे महान विदेशी नेताओं को भी भारत रत्न से नवाजा जा चुका है।
6. मरणोपरांत सम्मान की शुरुआत
शुरुआत में यह केवल जीवित व्यक्तियों को दिया जाता था। 1955 में नियमों में बदलाव कर 'मरणोपरांत' का प्रावधान जोड़ा गया। 1966 में लाल बहादुर शास्त्री इस श्रेणी में सम्मानित होने वाले पहले व्यक्तित्व बने।
7. उम्र के दो छोर: सचिन और कर्वे
क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर सबसे युवा (40 वर्ष) भारत रत्न विजेता हैं, जबकि धोंडो केशव कर्वे को उनके 100वें जन्मदिन पर सम्मानित किया गया था।
8. 2024 का ऐतिहासिक फैसला
नियमतः एक वर्ष में अधिकतम 3 लोगों को ही भारत रत्न दिया जा सकता है। परंतु 2024 में सरकार ने इस परंपरा को पीछे छोड़ते हुए 5 महान हस्तियों को यह सम्मान देने की घोषणा की, जो एक नया कीर्तिमान है।
9. स्व-अनुशंसा का विवाद
नेहरू और इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए यह सम्मान मिला। आलोचकों का तर्क है कि प्रधानमंत्री ही इस पुरस्कार की सिफारिश राष्ट्रपति से करते हैं, तो उन्होंने स्वयं के नाम की सिफारिश कैसे की? हालांकि, आधिकारिक रूप से कहा जाता है कि तत्कालीन राष्ट्रपतियों ने स्वयं विवेक से यह निर्णय लिया था।
10. नाम के साथ इस्तेमाल पर पाबंदी
संविधान के अनुच्छेद 18(1) के अनुसार, भारत रत्न प्राप्त करने वाला व्यक्ति इसे अपने नाम के आगे 'सरनेम' या 'टाइटल' के रूप में नहीं जोड़ सकता। उदाहरण के तौर पर, कोई अपना नाम "भारत रत्न [नाम]" नहीं लिख सकता।