साल 2026 की शुरुआत भारतीय कमोडिटी बाजार (MCX) के लिए बेहद आक्रामक रही है। साल के दूसरे ही दिन सोना, चांदी और कॉपर की कीमतों ने लंबी छलांग लगाई है। विशेष रूप से चांदी की कीमतों ने निवेशकों को चौंकाते हुए ₹2.43 लाख प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक स्तर को पार कर लिया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर इंडेक्स में गिरावट और चीन द्वारा सप्लाई रोके जाने से कीमतों को तगड़ा सपोर्ट मिल रहा है।
चांदी: 'रेयर अर्थ' की श्रेणी में आने से मची हलचल
चांदी की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण इसकी सप्लाई और डिमांड का असंतुलन है। मौजूदा समय में चांदी 'रेयर अर्थ' (Rare Earth) कैटेगरी का हिस्सा बन चुकी है, जिसकी वजह से वैश्विक स्तर पर इसकी मांग बढ़ी है लेकिन आपूर्ति कम हुई है।
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MCX का हाल: कारोबारी सत्र के दौरान चांदी करीब ₹7,600 उछलकर ₹2,43,443 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
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ग्लोबल मार्केट: अमेरिकी बाजारों में सिल्वर फ्यूचर 3.47% की तेजी के साथ $73.05 प्रति ओंस पर कारोबार कर रहा है। वहीं ब्रिटेन और यूरोप में भी इसमें 2% से ज्यादा की तेजी देखी जा रही है।
सोना: ₹1.36 लाख के ऊपर निकला भाव
सोने की कीमतों में भी भारी इजाफा देखा जा रहा है। स्पॉट गोल्ड की मांग बढ़ने से घरेलू बाजार में सोना अपनी नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
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MCX अपडेट: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने के दाम ₹1,200 की बढ़त के साथ ₹1,36,999 प्रति 10 ग्राम के हाई पर पहुंच गए। सुबह के सत्र में यह ₹1,36,627 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।
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अंतरराष्ट्रीय स्थिति: कॉमेक्स बाजार में गोल्ड फ्यूचर $4,387.70 प्रति ओंस तक पहुंच गया है, जो वैश्विक अनिश्चितता और डॉलर की कमजोरी का सीधा असर दर्शाता है।
कॉपर: औद्योगिक मांग और सप्लाई का असर
बेस मेटल्स में कॉपर (तांबा) भी पीछे नहीं है। औद्योगिक मांग और सप्लाई चेन में बाधाओं के चलते इसकी कीमतों में भी 1.50% से ज्यादा का उछाल देखा गया।
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कीमतें: MCX पर कॉपर ₹1,320 प्रति किलोग्राम के स्तर तक जा पहुंचा। आज बाजार ₹1,298.90 पर खुला था, जो पिछले सत्र के मुकाबले काफी बढ़त दिखाता है।
कीमतों में तेजी के 3 प्रमुख कारण
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चीन की रणनीति: चीन द्वारा चांदी और अन्य धातुओं की सप्लाई होल्ड करने से वैश्विक बाजार में शॉर्टेज पैदा हुई है।
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डॉलर इंडेक्स में गिरावट: अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से बुलियन (सोना-चांदी) में निवेश सुरक्षित माना जा रहा है।
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औद्योगिक मांग: ग्रीन एनर्जी और टेक सेक्टर में चांदी और कॉपर की बढ़ती उपयोगिता ने इन्हें कीमती बना दिया है।
जानकारों की राय: विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि कीमतों में तेजी जारी रहेगी, लेकिन यह पिछले साल (2025) की तुलना में थोड़ी स्थिर रह सकती है। निवेशकों को बाजार की इस अस्थिरता को देखते हुए सावधानी से कदम बढ़ाने की सलाह दी जा रही है।