पूर्व भारतीय ऑलराउंडर इरफान पठान हाल ही में तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की आलोचना को लेकर चर्चा में आ गए थे। इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के बाद इरफान ने बुमराह के वर्कलोड मैनेजमेंट और सीमित ओवरों के स्पेल पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी काफी आलोचना भी हुई। अब इरफान ने इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी है और साफ किया है कि उनका इरादा बुमराह की प्रतिबद्धता या एटीट्यूड पर सवाल उठाना बिल्कुल नहीं था।
क्या है मामला?
बुमराह हाल के वर्षों में भारत के सबसे भरोसेमंद तेज गेंदबाज बनकर उभरे हैं। लेकिन उन्हें पीठ और कमर की गंभीर चोट से भी जूझना पड़ा है, जिससे उनका खेल सीमित हो गया। इसके चलते भारतीय टीम मैनेजमेंट उन्हें लेकर वर्कलोड मैनेजमेंट की नीति अपना रहा है। कुछ मैचों में उन्हें आराम दिया जाता है और जब वे खेलते हैं, तब भी वे कई बार केवल 5-6 ओवर के छोटे स्पेल में ही गेंदबाजी करते हैं।
इरफान पठान की सफाई
एक ताजा इंटरव्यू में इरफान पठान ने कहा:
“मुझे बुमराह के वर्कलोड मैनेजमेंट से कोई दिक्कत नहीं है। मैं खुद एक फास्ट बॉलर रहा हूं, और जानता हूं कि शरीर पर कितना बोझ होता है। लेकिन अगर आप मैदान में हैं, तो आपको अपना सबकुछ झोंक देना चाहिए। मैं बुमराह के एटीट्यूड पर सवाल नहीं कर रहा। वह टेस्ट क्रिकेट को प्राथमिकता देते हैं, ये एक काबिल-ए-तारीफ बात है, खासकर उस स्थिति में जब पीठ की चोट के बाद कई खिलाड़ी यह फॉर्मेट छोड़ देते हैं।”
इरफान का कहना है कि वह बुमराह जैसे अनुभवी और मैच विनर खिलाड़ी से लंबे स्पेल की उम्मीद करते हैं, खासकर जब वह पूरी तरह फिट हों और महत्वपूर्ण मुकाबले चल रहे हों।
"लॉर्ड्स जैसे मुकाबले में स्पेल की लंबाई मायने रखती है"
पठान ने उदाहरण देते हुए कहा,
“अगर आप लॉर्ड्स जैसे बड़े टेस्ट मैच में भी 5-6 ओवर के स्पेल तक सीमित रहेंगे, तो परिणाम आपके पक्ष में आना मुश्किल हो जाएगा। हमें अपने बेस्ट गेंदबाज से ज्यादा ओवरों की जरूरत होती है। स्पेल की लंबाई से ही दबाव बनता है और विकेट निकलते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि वर्कलोड की रिकवरी प्रक्रिया मैच के बाद हो सकती है, लेकिन जब खिलाड़ी मैदान पर हो, तो उसकी प्राथमिकता टीम के लिए ज्यादा योगदान देना होना चाहिए।
क्यों उठा ये मुद्दा?
बुमराह हाल ही में कुछ टेस्ट मैचों में खेलने के बावजूद अपेक्षाकृत कम ओवर फेंकते नजर आए। इससे यह धारणा बनी कि वह अपने शरीर को सुरक्षित रखने के लिए कंट्रोल्ड गेंदबाजी कर रहे हैं। कुछ क्रिकेट एक्सपर्ट्स और फैंस ने इसे "सेलेक्टिव एफर्ट" कहकर आलोचना की। पठान ने इन्हीं प्रतिक्रियाओं के बीच यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य बुमराह की आलोचना नहीं, बल्कि टीम के हित में गेंदबाजी अप्रोच पर सुझाव देना था।
निष्कर्ष
इरफान पठान का यह बयान भारतीय क्रिकेट में एक अहम चर्चा को जन्म देता है — कि वर्कलोड मैनेजमेंट जरूरी है, लेकिन मैच के दौरान अगर बेस्ट प्लेयर अपनी पूरी क्षमता का उपयोग न करे, तो टीम को उसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। जसप्रीत बुमराह जैसे खिलाड़ी से उम्मीदें ज्यादा हैं, और जब वह मैदान पर हों, तो उनसे ज्यादा ओवर, ज्यादा इंटेंसिटी और ज्यादा इम्पैक्ट की उम्मीद करना गलत नहीं है।
आलोचना नहीं, बल्कि बेहतर टीम संतुलन के लिए सुझाव — यही है इरफान पठान का संदेश।