प्रयागराज न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश के कई शहर पिछले हफ्तों से बाढ़ की चपेट में हैं। मथुरा, प्रयागराज, कानपुर और वाराणसी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यमुना और गंगा के जलस्तर में कई जिलों में गिरावट आई है, लेकिन कुछ जिलों में भारी बारिश और बैराजों से छोड़ा गया पानी अब भी बढ़ रहा है। तटीय इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है और कई पुलों पर यातायात बंद किया गया है।
मथुरा में यमुना का जलस्तर फिर बढ़ गया है। बढ़ते जलस्तर की वजह से आवागमन बाधित हो गया है और किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। ज्वार, बाजरा और धान की खरीफ फसलें जलमग्न हैं। पशुपालकों को चारे की भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। छिनपारई गांव समेत कई क्षेत्रों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। नौहझील-शेरगढ़ मार्ग पर यमुना का जलस्तर बढ़ने से वाहन आवागमन ठप है। चौपहिया वाहनों को निकालने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली का सहारा लिया जा रहा है। चारपहिया वाहन निकालने का शुल्क 300 रुपए और बाइक का 50 रुपए है।
प्रयागराज में गंगा-यमुना के जलस्तर में गिरावट शुरू हुई है, लेकिन शहरवासियों में डर बना हुआ है। शुक्रवार सुबह यमुना का जलस्तर पिछले 24 घंटों में 24 सेंटीमीटर घटा, जबकि गंगा का जलस्तर 3 सेंटीमीटर बढ़ा। दोपहर के बाद घटाव शुरू हुआ, शाम चार बजे फाफामऊ में गंगा में 8 सेंटीमीटर, छतनाग में 6 सेंटीमीटर और नैनी में यमुना में 19 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई।
कानपुर और फर्रुखाबाद में गंगा का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है। बीते 20 दिनों से नदी लगातार उफान पर है। शमसाबाद क्षेत्र समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है और पुलियों पर तेज बहाव बना हुआ है। वहीं वाराणसी में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 20 सेंटीमीटर ऊपर स्थिर है, लेकिन घटाव शुरू हो गया है। इससे तटीय इलाकों में रहने वालों को राहत मिली है। हालांकि अभी कई गांवों में पानी भरा हुआ है और फसलें जलमग्न हैं।