प्रयागराज न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश में मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाला गंगा एक्सप्रेसवे भारत का सबसे बड़ा 'डिजिटल हाईवे' बनने जा रहा है। 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे न केवल यात्रा की दूरी घटाएगा, बल्कि अपनी अत्याधुनिक तकनीक, स्मार्ट सेंसर्स और भूमिगत यूटिलिटी कॉरिडोर के जरिए भारतीय बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित करेगा।
हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी:
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी विशेषता इसके साथ चलने वाला भूमिगत यूटिलिटी कॉरिडोर है। इसमें ऑप्टिकल फाइबर केबल, बिजली की लाइनें और गैस पाइपलाइनें बिछाई जाएंगी, जिससे भविष्य में मरम्मत या अपग्रेड के लिए सड़क खुदाई की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक्सप्रेसवे का यह फाइबर नेटवर्क 500 से अधिक गांवों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाएगा, जो 'ब्रॉडबैंड हाईवे' के रूप में 5G कनेक्टिविटी और डेटा केंद्रों को मजबूती प्रदान करेगा।
सुरक्षा और स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम:
सुरक्षा के लिहाज से गंगा एक्सप्रेसवे पर हर कुछ किलोमीटर पर हाई-resolution कैमरे और सेंसर्स लगाए गए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम वास्तविक समय में वाहनों की गति और गलत दिशा में ड्राइविंग की निगरानी करेगा। किसी भी दुर्घटना या असामान्य हलचल की स्थिति में, यह सिस्टम तुरंत कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजेगा, जिससे आपातकालीन प्रतिक्रिया समय (Emergency Response Time) में भारी कमी आएगी।
पर्यावरण और इंजीनियरिंग का तालमेल:
इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा गया है। इसमें लाखों टन फ्लाई ऐश (Fly Ash) का उपयोग किया गया है, जिससे मिट्टी का कटाव कम हुआ और प्रदूषण पर नियंत्रण मिला। निर्माण क्षमता का प्रमाण देते हुए, इस प्रोजेक्ट ने मात्र 24 घंटे में 10 किमी से अधिक क्रैश बैरियर बनाने का रिकॉर्ड भी बनाया है। साथ ही, प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा परियोजना के तहत बिछने वाली पाइपलाइनों से आसपास के क्षेत्रों को किफायती पीएनजी और सीएनजी की सुविधा भी मिलेगी।