प्रयागराज न्यूज डेस्क: प्रयागराज के माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या को आज तीन साल पूरे हो गए हैं, लेकिन शहर में इस गैंग का खौफ अब भी बरकरार है। 15 अप्रैल 2023 को हुई उस सनसनीखेज हत्या के बावजूद, अतीक के पुराने गुर्गे और करीबी सदस्य जमीनों पर कब्जे, रंगदारी और हत्या जैसी वारदातों को अंजाम देकर अपनी सक्रियता दर्ज करा रहे हैं। हाल ही में करेली के ऐनुद्दीनपुर में एक प्रॉपर्टी डीलर की सरेआम हत्या ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसमें अतीक के पुराने शूटरों का नाम सामने आया है।
सिर्फ आपराधिक घटनाएं ही नहीं, बल्कि अतीक गैंग का आर्थिक साम्राज्य भी सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है। नवंबर 2025 में बिल्डर डॉ. जीशानुल हक के अपहरण की कोशिश और बमरौली में एटीएस (ATS) व चुनाव कार्यालय के लिए चिह्नित सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के मामलों ने साफ कर दिया है कि गैंग का नेटवर्क आज भी काम कर रहा है। चार विभागों की एसआईटी (SIT) जांच में इस सिंडिकेट द्वारा किए गए आर्थिक अपराधों और बेनामी संपत्तियों की पुष्टि हो चुकी है।
इस बीच, हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'धुरंधर पार्ट 2' ने अतीक अहमद के पुराने विवादों को फिर से हवा दे दी है। फिल्म में दिखाए गए पाकिस्तानी कनेक्शन, आतंकी संगठनों से हथियारों की तस्करी और जाली नोटों के कारोबार के दृश्यों ने खुफिया एजेंसियों को फिर से चौकन्ना कर दिया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इन दावों की ठोस पुष्टि होना बाकी है, लेकिन 'इंटरनेशनल लिंक' का एंगल हमेशा से जांच के घेरे में रहा है।
कानूनी मोर्चे पर देखें तो पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती आज भी अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन, अशरफ की पत्नी जैनब और बहन आयशा नूरी की गिरफ्तारी है। तीन साल की फरारी के बाद भी ये महिलाएं पुलिस के हाथ नहीं आई हैं। वहीं, उमेश पाल हत्याकांड के मुख्य आरोपी गुड्डू मुस्लिम, अरमान और साबिर, जिन पर 5-5 लाख रुपये का इनाम घोषित है, अब भी फरार हैं। कुर्की और गैर-जमानती वारंट जैसी तमाम सख्त कार्रवाइयों के बावजूद इन इनामी अपराधियों का न पकड़ा जाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है।