नयी दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा सोने और चांदी के आयात शुल्क को 6% से बढ़ाकर 15% करने के फैसले ने भारतीय आभूषण उद्योग को एक नए मोड़ पर खड़ा कर दिया है। बुधवार, 13 मई 2026 को उद्योग विशेषज्ञों और प्रमुख आभूषण विक्रेताओं ने संकेत दिया कि इस नीतिगत बदलाव से घरेलू बाजार में अब कम कैरेट (14k और 18k) वाले गहनों की मांग में जबरदस्त उछाल आने की संभावना है। विदेशी मुद्रा बचाने और चालू खाता घाटे को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाए गए इस कदम से सोने की खुदरा कीमतों में प्रति 10 ग्राम ₹8,000 से ₹10,000 तक की वृद्धि देखी जा सकती है।
डिजाइन और सस्टेनेबिलिटी पर जोर
आयात शुल्क बढ़ने से न केवल कीमतें बढ़ेंगी, बल्कि उपभोक्ताओं के व्यवहार में भी बदलाव आएगा।
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लाइटवेट और ट्रेंडी ज्वेलरी: कल्याण ज्वेलर्स और अन्य प्रमुख ब्रांडों का मानना है कि अब उपभोक्ता भारी आभूषणों के बजाय 18 कैरेट के बारीक कारीगरी वाले गहनों को प्राथमिकता देंगे। इससे डिजाइन की विविधता बढ़ेगी और शुद्ध सोने की खपत कम होगी।
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पुराने सोने का पुनर्चक्रण (Recycling): धीरसन ज्वेलर्स के अनुसार, भारतीयों के घरों में लगभग 25,000 टन सोना निष्क्रिय पड़ा है। शुल्क वृद्धि के बाद अब लोग पुराने गहनों को बदलकर नए डिजाइन लेने के लिए प्रोत्साहित होंगे, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी।
बाजार विशेषज्ञों की चिंताएं और सुझाव
विशेषज्ञों ने इस वृद्धि के साथ-साथ कुछ चुनौतियों की ओर भी इशारा किया है।
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मांग में गिरावट: हेतल वकील वालिया जैसी डिजाइनरों का मानना है कि कीमतों में वृद्धि से ग्रामीण और मूल्य-संवेदनशील बाजारों में मांग 10-15% तक गिर सकती है, जिसका असर कारीगरों और सुनारों के रोजगार पर पड़ सकता है।
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ग्रे मार्केट का खतरा: अर्थ भारत इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के सचिन सावरिकर ने चेतावनी दी है कि शुल्क में अत्यधिक वृद्धि से 'ग्रे मार्केट' या तस्करी को बढ़ावा मिल सकता है, जैसा कि 2013 के दौरान देखा गया था।
हालांकि, मुथूट और मन्नापुरम जैसी गोल्ड लोन कंपनियों के लिए यह सकारात्मक खबर है क्योंकि गिरवी रखे सोने की वैल्यू बढ़ने से उनका कोलैटरल मजबूत होगा। सरकार का यह कदम अंततः भारतीयों को सोने के अधिक समझदारीपूर्ण और टिकाऊ उपभोग की ओर ले जा सकता है।