प्रयागराज न्यूज डेस्क: उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) ने ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अब पूरे 3294 किलोमीटर रेलमार्ग का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका है, जिससे परिचालन लगभग पूरी तरह इलेक्ट्रिक इंजनों से हो रहा है। इससे हर वर्ष सात करोड़ लीटर डीज़ल की बचत और करीब पांच लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी हो रही है। साथ ही ट्रेनों का समय पालन भी बेहतर हुआ है। प्रयागराज मंडल में 1210, झांसी मंडल में 1354 और आगरा मंडल में 730 किलोमीटर रेलमार्ग विद्युतीकृत हो चुका है। एनसीआर का पहला विद्युतीकृत खंड 1965 में कानपुर–पनकी था और अब यह भारतीय रेल का पहला पूर्ण विद्युतीकरण करने वाला ज़ोन बन गया है।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एनसीआर ने 142 ट्रेनों में हेड-ऑन-जनरेशन (एचओजी) प्रणाली स्थापित की है। इसके माध्यम से एलएचबी कोचों को बिजली सीधे इंजन से मिल रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में केवल जुलाई तक ही 3260 किलोलीटर हाई स्पीड डीज़ल की बचत हुई, जिससे दो हजार टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन में कमी आई। यह कदम भारतीय रेल के 2030 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण है।
एनसीआर ने अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देते हुए 12.7 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में इनसे 118.7 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ, जिससे 5.34 करोड़ रुपए की बचत और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी हुई। अब एनसीआर 18 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता वाले संयंत्र स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है, जिससे कुल सौर क्षमता 30 मेगावाट से अधिक हो जाएगी।
इस क्रम में, उत्तर मध्य रेलवे अपनी सेवा इमारतों को भी ऊर्जा दक्ष बनाने पर जोर दे रहा है। वर्ष 2024-25 में 10 सर्विस बिल्डिंग्स को ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) द्वारा ज़ीरो या ज़ीरो-प्लस प्रमाणन प्राप्त हुआ। इस वर्ष 15 और इमारतों को प्रमाणन दिलाने की प्रक्रिया चल रही है, जिससे एनसीआर की हर गतिविधि और संचालन पर्यावरण-अनुकूल बने।