प्रयागराज न्यूज डेस्क: प्रयागराज में सात दिन से लापता पूर्व जिला पंचायत सदस्य रणधीर यादव की गुमशुदगी का राजफाश हो गया है। बमरौली रेलवे स्टेशन आउटर पर मिली क्षत-विक्षत लाश, जिसे पुलिस ने पहचान न होने पर महज 72 घंटे बाद लावारिस मानकर अंतिम संस्कार कर दिया था, असल में रणधीर यादव की ही थी। इस लापरवाही ने न सिर्फ अपराधियों को फायदा पहुंचाया बल्कि स्वजन को गहरा आघात भी दिया।
मामले की जांच में चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब पता चला कि हत्या के पीछे अवैध संबंध कारण बने। पुलिस ने मुख्य आरोपित उदय यादव की सास समेत दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि नामजद समेत छह आरोपित अभी भी फरार हैं। पुलिस लगातार दबिश दे रही है। रणधीर यादव की पत्नी बबली यादव, जो वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य हैं, ने पहले गुमशुदगी और फिर अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था।
पूछताछ में सामने आया कि उदय यादव को अपनी पत्नी अंजली और रणधीर के बीच अवैध संबंध की जानकारी थी। अंजली की संदिग्ध मौत 11 जुलाई को हो चुकी थी। इसके बाद उदय ने अपनी सास लीला यादव, भाई विजय और अन्य साथियों के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची। 22 अगस्त की रात राम सिंह ने रणधीर को शराब पिलाई और फिर स्कार्पियो में बैठाकर साथियों को रास्ते में बिठा लिया।
चलती गाड़ी में ही रणधीर की गला दबाकर हत्या कर दी गई और शव को बमरौली रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया गया। इसके बाद आरोपितों ने स्कार्पियो को चित्रकूट जंगल में छिपाने की कोशिश की, लेकिन वाहन कीचड़ में फंस गया। डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत ने प्रेसवार्ता कर पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया और बताया कि फरार आरोपितों की तलाश जारी है।